माताजी जोे जीती हैं, वो वेदान्त है।
‘‘माँ मुझसे बायोकेमिस्ट्री के बारे में बोल रही थी। विटामिन बी, विटामिन डी, कैंसर क्या है और उसका क्या उपचार क्या है, आदि। यह मेरे लिये बड़ा आश्चर्य था। पर्यावरण के बारे में मैंने माँ के विचार सुने। मैंने शास्त्र में पढा था भगवान के दो रूप है। एक मूर्त और दूसरा अमूर्त। मैंने सुना है, माँ ने वेदशास्त्र का अध्ययन गुरु-शिष्य परंपरा से नहीं किया है, लेकिन माताजी जोे जीती हैं, वो वेदान्त है। माता ने मुझे बताया कि यह सब विश्व भगवान की जीवंत अभिव्यक्ति है। सृष्टिकर्ता और सृष्टि अलग नहीं है। इसमें अभेद है। यही अद्वैत है। यही एकत्व है। यही अद्वैत तत्त्वज्ञान है। सृष्टि और सृष्टिकर्ता अलग नहीं है। और वैसा माता स्वयं जीती भी हैं। सारी सृष्टि भगवान का स्वरूप मानकर सेवा करती हैं तो मुझे लगा कि आत्मज्ञानी, आत्मवेत्ता ऋषि कैसे होते थे – तो माताजी जैसै होते थे। – योगगुरु श्रीरामदेवजी बाबा
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