अम्मा के दर्शन के पश्चात योगगुरु श्रीराम…

अम्मा के दर्शन के पश्चात योगगुरु श्रीरामदेवजी बाबा अम्मा के साथ भजन हॉल में आये। अम्मा ने उन्हें आश्रमवासियों को संबोधित करने का अनुरोध किया।
इस अवसर पर अपने प्रबोधन में वे बोले, ‘‘मैं पहली बार माँ के दर्शन के लिये आया हूँ और एक दिव्य माँ का सान्निध्य, स्पर्श, करुणा, और आचरण कैसा होता है, यह अभी मैंने कुछ ही पलों में अनुभव किया। मैंने माँ के बारे में बहुत सुना था कि माँ बहुत करुणामय हैं, वो बहुत सेवाकार्य कर रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में सेवा, स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवा, अन्य धर्मार्थ सेवाकार्य अम्मा यहाँ कर रही हैं। बहुत करुणा वाली हैं। बहुत सेवावाली हैं और मैंने यहाँ और एक बात देखी कि माँ बहुत करुणामय तो हैं ही, साथ ही माँ का आध्यात्मिक ज्ञान और व्यावहारिक ज्ञान भी बहुत उँचा है।

माताजी जोे जीती हैं, वो वेदान्त है।
‘‘माँ मुझसे बायोकेमिस्ट्री के बारे में बोल रही थी। विटामिन बी, विटामिन डी, कैंसर क्या है और उसका क्या उपचार क्या है, आदि। यह मेरे लिये बड़ा आश्चर्य था। पर्यावरण के बारे में मैंने माँ के विचार सुने। मैंने शास्त्र में पढा था भगवान के दो रूप है। एक मूर्त और दूसरा अमूर्त। मैंने सुना है, माँ ने वेदशास्त्र का अध्ययन गुरु-शिष्य परंपरा से नहीं किया है, लेकिन माताजी जोे जीती हैं, वो वेदान्त है। माता ने मुझे बताया कि यह सब विश्व भगवान की जीवंत अभिव्यक्ति है। सृष्टिकर्ता और सृष्टि अलग नहीं है। इसमें अभेद है। यही अद्वैत है। यही एकत्व है। यही अद्वैत तत्त्वज्ञान है। सृष्टि और सृष्टिकर्ता अलग नहीं है। और वैसा माता स्वयं जीती भी हैं। सारी सृष्टि भगवान का स्वरूप मानकर सेवा करती हैं तो मुझे लगा कि आत्मज्ञानी, आत्मवेत्ता ऋषि कैसे होते थे – तो माताजी जैसै होते थे।
see more: http://amrit.am/RamdevBaba